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mahabharat 13.135.29-30: अतः दीपदान और जलदान का विशेष प्रयत्न करना चाहिए। विशेषकर पुष्कर तीर्थ में वेदज्ञ ब्राह्मण को कपिला का दान करने वाले को मिलने वाले फल के बारे में सुनो। उसे बैलों सहित सौ गायों का दान करने का अनन्त फल मिलता है।   |   mahabharat अध्याय 13.135: अरुन्धती, धर्मराज और चित्रगुप्तद्वारा धर्मसम्बन्धी रहस्यका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 135: अरुन्धती, धर्मराज और चित्रगुप्तद्वारा धर्मसम्बन्धी रहस्यका वर्णन  »  श्लोक 29-30
 
 
श्लोक  13.135.29-30 
तस्माद् दीप: प्रदातव्य: पानीयं च विशेषत:।
कपिलां ये प्रयच्छन्ति ब्राह्मणे वेदपारगे॥ २९॥
पुष्करे च विशेषेण श्रूयतां तस्य यत् फलम्।
गोशतं सवृषं तेन दत्तं भवति शाश्वतम्॥ ३०॥
 
 
अनुवाद
अतः दीपदान और जलदान का विशेष प्रयत्न करना चाहिए। विशेषकर पुष्कर तीर्थ में वेदज्ञ ब्राह्मण को कपिला का दान करने वाले को मिलने वाले फल के बारे में सुनो। उसे बैलों सहित सौ गायों का दान करने का अनन्त फल मिलता है।
 
Therefore, one should make special efforts to donate lamps and water. Especially, listen to the rewards of donations received by those who donate Kapila to a Brahmin who is well versed in Vedas at Pushkar Tirtha. He gets the eternal reward of donating a hundred cows along with bulls.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)