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mahabharat 13.135.24: उस धर्म में व्यय तो बहुत कम है, परन्तु लाभ महान है। इससे मृत्यु के बाद भी महान सुख की प्राप्ति होती है। जल के गुण दिव्य हैं। ये गुण विशेष रूप से प्रेतलोक में लक्षित होते हैं। 24॥   |   mahabharat अध्याय 13.135: अरुन्धती, धर्मराज और चित्रगुप्तद्वारा धर्मसम्बन्धी रहस्यका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 135: अरुन्धती, धर्मराज और चित्रगुप्तद्वारा धर्मसम्बन्धी रहस्यका वर्णन  »  श्लोक 24
 
 
श्लोक  13.135.24 
अल्पव्ययं महार्थं च प्रेत्य चैव सुखोदयम्।
पानीयस्य गुणा दिव्या: प्रेतलोके विशेषत:॥ २४॥
 
 
अनुवाद
उस धर्म में व्यय तो बहुत कम है, परन्तु लाभ महान है। इससे मृत्यु के बाद भी महान सुख की प्राप्ति होती है। जल के गुण दिव्य हैं। ये गुण विशेष रूप से प्रेतलोक में लक्षित होते हैं। 24॥
 
In that religion the expenditure is very little, but the benefit is great. Through this one attains great happiness even after death. The properties of water are divine. These qualities are especially targeted in the ghostly world. 24॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)