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तत्र दुर्गमनुप्राप्ता: क्षुत्तृष्णापरिपीडिता:।
दह्यमाना विपच्यन्ते न तत्रास्ति पलायनम्॥ २२॥
अनुवाद
अपने पापों के कारण दुर्गम नरक में फंसे हुए प्राणी भूख-प्यास से पीड़ित होते हैं और जलती हुई आग में पकते हैं। उस यातना से बचने का कोई उपाय नहीं है।
Beings trapped in the inaccessible hell due to their sins suffer from hunger and thirst and are cooked in burning fire. There is no way to escape from that torture.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥