vedamrit
Reset
Home
ग्रन्थ
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
श्रीमद् भगवद गीता
______________
श्री विष्णु पुराण
श्रीमद् भागवतम
______________
श्रीचैतन्य भागवत
वैष्णव भजन
About
Contact
श्री महाभारत
»
पर्व 13: अनुशासन पर्व
»
अध्याय 135: अरुन्धती, धर्मराज और चित्रगुप्तद्वारा धर्मसम्बन्धी रहस्यका वर्णन
»
श्लोक 12
श्लोक
13.135.12
साधु साध्विति चोद्दिष्टं दैवतै: पितृभिस्तथा।
भूतैश्चैव सुसंहृष्टै: पूजिता साप्यरुन्धती॥ १२॥
अनुवाद
यह सुनकर देवता, पितर और समस्त प्राणी अत्यन्त प्रसन्न हुए और उन सबने देवी अरुन्धती का हार्दिक अभिनन्दन किया और उनकी स्तुति की।॥12॥
Hearing this, the gods, ancestors and all living beings became very happy. They all congratulated them and praised Goddess Arundhati profusely.॥ 12॥
✨ ai-generated
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas