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mahabharat 13.135.10-11: तीनों लोकों में जो-जो तीर्थ सिद्धों, चारणों और महर्षियों द्वारा सेवित माने जाते हैं, उनमें स्नान करने से वही फल प्राप्त होता है, जो गौओं के सींगों के जल को सिर पर छिड़कने से प्राप्त होता है।॥10-11॥   |   mahabharat अध्याय 13.135: अरुन्धती, धर्मराज और चित्रगुप्तद्वारा धर्मसम्बन्धी रहस्यका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 135: अरुन्धती, धर्मराज और चित्रगुप्तद्वारा धर्मसम्बन्धी रहस्यका वर्णन  »  श्लोक 10-11
 
 
श्लोक  13.135.10-11 
श्रूयन्ते यानि तीर्थानि त्रिषु लोकेषु कानिचित्॥ १०॥
सिद्धचारणजुष्टानि सेवितानि महर्षिभि:।
अभिषेक: समस्तेषां गवां शृङ्गोदकस्य च॥ ११॥
 
 
अनुवाद
तीनों लोकों में जो-जो तीर्थ सिद्धों, चारणों और महर्षियों द्वारा सेवित माने जाते हैं, उनमें स्नान करने से वही फल प्राप्त होता है, जो गौओं के सींगों के जल को सिर पर छिड़कने से प्राप्त होता है।॥10-11॥
 
Whatever are the holy places in the three worlds which are known to be served by Siddhas, Charanas and Maharishis, the same benefits are obtained by bathing in them, which can be obtained by sprinkling one's head with the water from the horns of cows.॥ 10-11॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)