श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 132: अग्नि, लक्ष्मी, अंगिरा, गार्ग्य, धौम्य तथा जमदग्निके द्वारा धर्मके रहस्यका वर्णन  »  श्लोक 9-10
 
 
श्लोक  13.132.9-10 
गार्ग्य उवाच
आतिथ्यं सततं कुर्याद् दीपं दद्यात् प्रतिश्रये।
वर्जयानो दिवा स्वापं न च मांसानि भक्षयेत्॥ ९॥
गोब्राह्मणं न हिंस्याच्च पुष्कराणि च कीर्तयेत्।
एष श्रेष्ठतमो धर्म: सरहस्यो महाफल:॥ १०॥
 
 
अनुवाद
गार्ग्य बोले, "अतिथियों का सदैव स्वागत करो, घर में दीपक जलाओ, दिन में सोना छोड़ दो। मांस कभी मत खाओ। गाय या ब्राह्मण की हत्या मत करो तथा प्रतिदिन तीनों पुष्कर तीर्थों का नाम जपो। अपने रहस्यों सहित यह उत्तम धर्म महान फल देने वाला है।" ॥9-10॥
 
Gargya said, "Always welcome guests, light a lamp in the house, stop sleeping during the day. Never eat meat. Do not kill a cow or a Brahmin and chant the name of the three Pushkar Tirthas every day. This best religion with its secrets gives great results. ॥9-10॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)