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mahabharat 13.132.12-14h: इस परम गोपनीय बात को सुनो। श्राद्ध, यज्ञ, तीर्थ और उत्सवों में देवताओं के लिए तैयार किया गया नैवेद्य यदि रजस्वला, कोढ़ी या बांझ स्त्री देख ले, तो देवता उसकी आँखों से देखा हुआ नैवेद्य स्वीकार नहीं करते और पितर भी तेरह वर्षों तक अप्रसन्न रहते हैं।   |   mahabharat अध्याय 13.132: अग्नि, लक्ष्मी, अंगिरा, गार्ग्य, धौम्य तथा जमदग्निके द्वारा धर्मके रहस्यका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 132: अग्नि, लक्ष्मी, अंगिरा, गार्ग्य, धौम्य तथा जमदग्निके द्वारा धर्मके रहस्यका वर्णन  »  श्लोक 12-14h
 
 
श्लोक  13.132.12-14h 
इदं च परमं गुह्यं सरहस्यं निबोधत।
श्राद्धकल्पे च दैवे च तैर्थिके पर्वणीषु च॥ १२॥
रजस्वला च या नारी श्वित्रिकापुत्रिका च या।
एताभिश्चक्षुषा दृष्टं हविर्नाश्नन्ति देवता:॥ १३॥
पितरश्च न तुष्यन्ति वर्षाण्यपि त्रयोदश।
 
 
अनुवाद
इस परम गोपनीय बात को सुनो। श्राद्ध, यज्ञ, तीर्थ और उत्सवों में देवताओं के लिए तैयार किया गया नैवेद्य यदि रजस्वला, कोढ़ी या बांझ स्त्री देख ले, तो देवता उसकी आँखों से देखा हुआ नैवेद्य स्वीकार नहीं करते और पितर भी तेरह वर्षों तक अप्रसन्न रहते हैं।
 
Listen to this most secret. If the offerings prepared for the gods during the Shraddha ceremony, Yagna, Tirtha ceremony and festivals are seen by a menstruating, leper or barren woman, the gods do not accept the offerings seen by their eyes and the ancestors also remain unhappy for thirteen years. 12-13 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)