अपि क्रतुशतैरिष्ट्वा क्षयं गच्छति तद्धवि:।
न तु क्षीयन्ति ते धर्मा: श्रद्दधानै: प्रयोजिता:॥ ११॥
अनुवाद
सैकड़ों बार किये गये यज्ञ का फल क्षीण हो जाता है; किन्तु यदि धर्मात्मा पुरुष उपर्युक्त धर्म का पालन करते हैं, तो वह कभी क्षीण नहीं होता ॥11॥
The fruits of a sacrifice performed hundreds of times get diminished; however, if the above-mentioned Dharma is followed by devout men, it never gets diminished. ॥ 11॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥