श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 130: श्राद्धके विषयमें देवदूत और पितरोंका, पापोंसे छूटनेके विषयमें महर्षि विद्युत्प्रभ और इन्द्रका, धर्मके विषयमें इन्द्र और बृहस्पतिका तथा वृषोत्सर्ग आदिके विषयमें देवताओं, ऋषियों और पितरोंका संवाद  »  श्लोक 79-80h
 
 
श्लोक  13.130.79-80h 
यस्तु शृङ्गगतं पङ्कं कूलादुद्‍धृत्य तिष्ठति॥ ७९॥
पितरस्तेन गच्छन्ति सोमलोकमसंशयम्।
 
 
अनुवाद
जो व्यक्ति नदी या तालाब के किनारे खड़े होकर बैल की बलि देता है और उसके सींगों से कीचड़ उछालता है, उसके पितर निस्संदेह चंद्रलोक को जाते हैं।
 
The ancestors of one who sacrifices a bull by standing on the bank of a river or pond and throwing up mud with his horns, undoubtedly go to the Moon realm. 79 1/2
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)