श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 130: श्राद्धके विषयमें देवदूत और पितरोंका, पापोंसे छूटनेके विषयमें महर्षि विद्युत्प्रभ और इन्द्रका, धर्मके विषयमें इन्द्र और बृहस्पतिका तथा वृषोत्सर्ग आदिके विषयमें देवताओं, ऋषियों और पितरोंका संवाद  »  श्लोक 77-78h
 
 
श्लोक  13.130.77-78h 
के गुणा नीलषण्डस्य प्रमुक्तस्य तपोधना:॥ ७७॥
वर्षासु दीपदानेन तथैव च तिलोदकै:।
 
 
अनुवाद
‘हे तपस्वियों! नील गाय को छोड़ने, वर्षा ऋतु में दीपक जलाने और अमावस्या को तिल मिश्रित जल अर्पण करने से क्या लाभ होता है?’॥77 1/2॥
 
‘O ascetics! What are the benefits of releasing a blue bull, lighting lamps during the rainy season and offering water mixed with sesame seeds on the new moon day?'॥ 77 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)