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mahabharat 13.129.d24: जो अविनाशी, अविनाशी, एक (अद्वितीय), सगुण, नित्य, सनातन, सगुण, निर्गुण, सबके आदि कारण, स्थूल, अत्यंत सूक्ष्म, उपमा रहित, उपमा के योग्य और योगियों के जानने योग्य हैं, उन त्रिभुवनगुरु भगवान विष्णु की शरण जाओ।   |   mahabharat अध्याय 13.129: नारदका पुण्डरीकको भगवान‍् नारायणकी आराधनाका उपदेश तथा उन्हें भगवद्धामकी प्राप्ति, सामगुणकी प्रशंसा, ब्राह्मणका राक्षसके सफेद और दुर्बल होनेका कारण बताना   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 129: नारदका पुण्डरीकको भगवान‍् नारायणकी आराधनाका उपदेश तथा उन्हें भगवद्धामकी प्राप्ति, सामगुणकी प्रशंसा, ब्राह्मणका राक्षसके सफेद और दुर्बल होनेका कारण बताना  »  श्लोक d24
 
 
श्लोक  13.129.d24 
अजरममरमेकं ध्येयमाद्यन्तशून्यं
सगुणमगुणमाद्यं स्थूलमत्यन्तसूक्ष्मम्।
निरुपममुपमेयं योगिविज्ञानगम्यं
त्रिभुवनगुरुमीशं सम्प्रपद्यस्व विष्णुम्॥ )
 
 
अनुवाद
जो अविनाशी, अविनाशी, एक (अद्वितीय), सगुण, नित्य, सनातन, सगुण, निर्गुण, सबके आदि कारण, स्थूल, अत्यंत सूक्ष्म, उपमा रहित, उपमा के योग्य और योगियों के जानने योग्य हैं, उन त्रिभुवनगुरु भगवान विष्णु की शरण जाओ।
 
Take refuge in that Tribhuvanguru Lord Vishnu who is immortal, immortal, one (unique), objective, eternal, eternal, sagun, nirgun, the primary cause of all, gross, extremely subtle, without simile, worthy of simile and knowable to yogis.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)