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mahabharat 13.129.d22: भगवान अधोक्षज श्री हरि, जिनका निवास योग है, सबके द्वारा पूजित होकर भक्त पुण्डरीक को साथ लेकर अपने धाम को लौट गए।   |   mahabharat अध्याय 13.129: नारदका पुण्डरीकको भगवान‍् नारायणकी आराधनाका उपदेश तथा उन्हें भगवद्धामकी प्राप्ति, सामगुणकी प्रशंसा, ब्राह्मणका राक्षसके सफेद और दुर्बल होनेका कारण बताना   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 129: नारदका पुण्डरीकको भगवान‍् नारायणकी आराधनाका उपदेश तथा उन्हें भगवद्धामकी प्राप्ति, सामगुणकी प्रशंसा, ब्राह्मणका राक्षसके सफेद और दुर्बल होनेका कारण बताना  »  श्लोक d22
 
 
श्लोक  13.129.d22 
अथ तेनैव भगवानात्मलोकमधोक्षज:।
गत: सम्पूजित: सर्वै: स योगनिलयो हरि:॥
 
 
अनुवाद
भगवान अधोक्षज श्री हरि, जिनका निवास योग है, सबके द्वारा पूजित होकर भक्त पुण्डरीक को साथ लेकर अपने धाम को लौट गए।
 
Lord Adhokshaj Shri Hari, whose abode is Yoga, being worshipped by all, returned to his abode taking along with him the devotee Pundarik.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)