Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.129.d21: तदनन्तर, बहुत काल के पश्चात् भगवान उसी रूप में पुण्डरीक के समक्ष प्रत्यक्ष प्रकट हुए। उस समय सम्पूर्ण वेद तथा देवता, गन्धर्व और किन्नर नाना प्रकार के स्तोत्रों से उनकी स्तुति कर रहे थे। | mahabharat अध्याय 13.129: नारदका पुण्डरीकको भगवान् नारायणकी आराधनाका उपदेश तथा उन्हें भगवद्धामकी प्राप्ति, सामगुणकी प्रशंसा, ब्राह्मणका राक्षसके सफेद और दुर्बल होनेका कारण बताना । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
अथ कालेन महता तथा प्रत्यक्षतां गत:।
संस्तुत: स्तुतिभिर्वेदैर्देवगन्धर्वकिन्नरै:॥
अनुवाद
तदनन्तर, बहुत काल के पश्चात् भगवान उसी रूप में पुण्डरीक के समक्ष प्रत्यक्ष प्रकट हुए। उस समय सम्पूर्ण वेद तथा देवता, गन्धर्व और किन्नर नाना प्रकार के स्तोत्रों से उनकी स्तुति कर रहे थे।
Subsequently, after a long time, God appeared directly to Pundarika in the same form. At that time, the entire Vedas and gods, Gandharvas and Kinnars used to praise him with various types of hymns.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥