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mahabharat 13.129.d18: हे उत्तम व्रत का पालन करने वाले पुण्डरीक! हजारों जन्म लेने पर भी भगवान विष्णु का मन और बुद्धि उनमें स्थिर होना अत्यंत दुर्लभ है। अतः तुम उन भक्त नारायणदेव की भली-भाँति पूजा करो।   |   mahabharat अध्याय 13.129: नारदका पुण्डरीकको भगवान‍् नारायणकी आराधनाका उपदेश तथा उन्हें भगवद्धामकी प्राप्ति, सामगुणकी प्रशंसा, ब्राह्मणका राक्षसके सफेद और दुर्बल होनेका कारण बताना   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 129: नारदका पुण्डरीकको भगवान‍् नारायणकी आराधनाका उपदेश तथा उन्हें भगवद्धामकी प्राप्ति, सामगुणकी प्रशंसा, ब्राह्मणका राक्षसके सफेद और दुर्बल होनेका कारण बताना  »  श्लोक d18
 
 
श्लोक  13.129.d18 
जन्मान्तरसहस्रेषु दुर्लभा तद्‍गता मति:।
तद्भक्तवत्सलं देवं समाराधय सुव्रत॥
 
 
अनुवाद
हे उत्तम व्रत का पालन करने वाले पुण्डरीक! हजारों जन्म लेने पर भी भगवान विष्णु का मन और बुद्धि उनमें स्थिर होना अत्यंत दुर्लभ है। अतः तुम उन भक्त नारायणदेव की भली-भाँति पूजा करो।
 
Pundarika who observes the best fast! Even after taking thousands of births, it is very rare for Lord Vishnu to have his mind and intellect fixed on him. Therefore, you should worship that devoted Narayandev very well.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)