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mahabharat 13.129.d16: जो मनुष्य नारायण की पूजा में लीन रहता है, वह कभी पाप से कलंकित नहीं होता। वह हजार किरणों वाले उदीयमान सूर्य के समान समस्त जगत को पवित्र करता है।   |   mahabharat अध्याय 13.129: नारदका पुण्डरीकको भगवान‍् नारायणकी आराधनाका उपदेश तथा उन्हें भगवद्धामकी प्राप्ति, सामगुणकी प्रशंसा, ब्राह्मणका राक्षसके सफेद और दुर्बल होनेका कारण बताना   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 129: नारदका पुण्डरीकको भगवान‍् नारायणकी आराधनाका उपदेश तथा उन्हें भगवद्धामकी प्राप्ति, सामगुणकी प्रशंसा, ब्राह्मणका राक्षसके सफेद और दुर्बल होनेका कारण बताना  »  श्लोक d16
 
 
श्लोक  13.129.d16 
लिप्यते न स पापेन नारायणपरायण:।
पुनाति सकलं लोकं सहस्रांशुरिवोदित:॥
 
 
अनुवाद
जो मनुष्य नारायण की पूजा में लीन रहता है, वह कभी पाप से कलंकित नहीं होता। वह हजार किरणों वाले उदीयमान सूर्य के समान समस्त जगत को पवित्र करता है।
 
A man who is devoted to the worship of Narayana is never tainted by sin. Like the rising Sun with a thousand rays, he purifies the entire world.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)