Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.129.d13: जो आलस्य त्यागकर दो क्षण भी भगवान नारायण का ध्यान करता है, उसे परम सौभाग्य की प्राप्ति होती है। फिर जो सदैव उनकी पूजा और ध्यान में तत्पर रहता है, उसके विषय में क्या कहा जा सकता है? | mahabharat अध्याय 13.129: नारदका पुण्डरीकको भगवान् नारायणकी आराधनाका उपदेश तथा उन्हें भगवद्धामकी प्राप्ति, सामगुणकी प्रशंसा, ब्राह्मणका राक्षसके सफेद और दुर्बल होनेका कारण बताना । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
मुहूर्तमपि यो ध्यायेन्नारायणमतन्द्रित:।
सोऽपि सद्गतिमाप्नोति किं पुनस्तत्परायण:॥
अनुवाद
जो आलस्य त्यागकर दो क्षण भी भगवान नारायण का ध्यान करता है, उसे परम सौभाग्य की प्राप्ति होती है। फिर जो सदैव उनकी पूजा और ध्यान में तत्पर रहता है, उसके विषय में क्या कहा जा सकता है?
He who leaves his laziness and meditates on Lord Narayana for even two moments, attains the best of fortune. Then what can be said about the one who is always devoted to his worship and meditation.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥