Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.129.6: ब्राह्मण न केवल बुद्धिमान था, बल्कि शास्त्रों का ज्ञाता भी था। इसलिए उस अत्यंत भयानक राक्षस को देखकर भी वह न तो भयभीत हुआ, न ही व्यथित हुआ। बल्कि उसने उसके विरुद्ध साम नीति का प्रयोग किया। | mahabharat अध्याय 13.129: नारदका पुण्डरीकको भगवान् नारायणकी आराधनाका उपदेश तथा उन्हें भगवद्धामकी प्राप्ति, सामगुणकी प्रशंसा, ब्राह्मणका राक्षसके सफेद और दुर्बल होनेका कारण बताना । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
स बुद्धिश्रुतिसम्पन्नस्तं दृष्ट्वातीव भीषणम्।
सामैवास्मिन् प्रयुयुजे न मुमोह न विव्यथे॥ ६॥
अनुवाद
ब्राह्मण न केवल बुद्धिमान था, बल्कि शास्त्रों का ज्ञाता भी था। इसलिए उस अत्यंत भयानक राक्षस को देखकर भी वह न तो भयभीत हुआ, न ही व्यथित हुआ। बल्कि उसने उसके विरुद्ध साम नीति का प्रयोग किया।
The Brahmin was not only intelligent but also a scholar of the scriptures. Therefore, even after seeing that extremely terrifying demon, he was neither frightened nor distressed. Rather, he used the policy of Sama Niti against him. 6.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥