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mahabharat 13.129.5: एक बुद्धिमान और बातूनी ब्राह्मण निर्जन वन में विचरण कर रहा था। उसी समय एक राक्षस आया और उसे खाने की इच्छा से पकड़ लिया। बेचारा ब्राह्मण बड़ी विपत्ति में पड़ गया ॥5॥   |   mahabharat अध्याय 13.129: नारदका पुण्डरीकको भगवान‍् नारायणकी आराधनाका उपदेश तथा उन्हें भगवद्धामकी प्राप्ति, सामगुणकी प्रशंसा, ब्राह्मणका राक्षसके सफेद और दुर्बल होनेका कारण बताना   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 129: नारदका पुण्डरीकको भगवान‍् नारायणकी आराधनाका उपदेश तथा उन्हें भगवद्धामकी प्राप्ति, सामगुणकी प्रशंसा, ब्राह्मणका राक्षसके सफेद और दुर्बल होनेका कारण बताना  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  13.129.5 
कश्चिद् वाग्बुद्धिसम्पन्नो ब्राह्मणो विजने वने।
गृहीत: कृच्छ्रमापन्नो रक्षसा भक्षयिष्यता॥ ५॥
 
 
अनुवाद
एक बुद्धिमान और बातूनी ब्राह्मण निर्जन वन में विचरण कर रहा था। उसी समय एक राक्षस आया और उसे खाने की इच्छा से पकड़ लिया। बेचारा ब्राह्मण बड़ी विपत्ति में पड़ गया ॥5॥
 
An intelligent and talkative Brahmin was roaming in a deserted forest. At that time a demon came and caught him with the desire to eat him. The poor Brahmin was in great trouble. ॥ 5॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)