Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.125.26: जो मनुष्य दूसरों का धन चुराते हैं, वे दुःख भोगते हैं और नरक में जाते हैं। उपर्युक्त शुभ-अशुभ कर्मों के अतिरिक्त अन्य कोई भी साधारण कर्म न तो पुण्य है और न पाप॥ 26॥ | mahabharat अध्याय 13.125: व्यास और मैत्रेयका संवाद—दानकी प्रशंसा और कर्मका रहस्य । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
द्रव्याण्याददते चैव दु:खं यान्ति पतन्ति च।
ततोऽन्यत् कर्म यत्किंचिन्न पुण्यं न च पातकम्॥ २६॥
अनुवाद
जो मनुष्य दूसरों का धन चुराते हैं, वे दुःख भोगते हैं और नरक में जाते हैं। उपर्युक्त शुभ-अशुभ कर्मों के अतिरिक्त अन्य कोई भी साधारण कर्म न तो पुण्य है और न पाप॥ 26॥
Those people who steal others' wealth suffer and go to hell. Any ordinary action other than the above-mentioned good and bad deeds is neither a virtue nor a sin.॥ 26॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥