श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 125: व्यास और मैत्रेयका संवाद—दानकी प्रशंसा और कर्मका रहस्य  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  13.125.11 
इति वेदोक्तमृषिभि: पुरस्तात् परिकल्पितम्।
इदानीं चैव न: कृत्यं पुरस्ताच्च परिश्रुतम्॥ ११॥
 
 
अनुवाद
वेदों के इस कथन का पालन सबसे पहले ऋषियों ने किया था। हमने भी इसे बहुत पहले सुना है और अब भी वेदों की इस आज्ञा का पालन करना हमारा कर्तव्य है।॥11॥
 
This statement of the Vedas was first followed by the sages. We too have heard it a long time ago and even now it is our duty to follow this command of the Vedas.॥ 11॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)