श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 122: शुभ कर्मसे एक कीडे़को पूर्व-जन्मकी स्मृति होना और कीट-योनिमें भी मृत्युका भय एवं सुखकी अनुभूति बताकर कीड़ेका अपने कल्याणका उपाय पूछना  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  13.122.9 
व्यास उवाच
कीट संत्रस्तरूपोऽसि त्वरितश्चैव लक्ष्यसे।
क्व धावसि तदाचक्ष्व कुतस्ते भयमागतम्॥ ९॥
 
 
अनुवाद
व्यास ने पूछा, "कीट! आज तुम बहुत डरे हुए और चिंतित लग रहे हो। बताओ तुम कहाँ भाग रहे हो? तुम्हें यह भय कहाँ से मिला?"
 
Vyasa asked, "Insect! Today you look very scared and anxious. Tell me where are you running to? Where have you got this fear from?"
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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