श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 122: शुभ कर्मसे एक कीडे़को पूर्व-जन्मकी स्मृति होना और कीट-योनिमें भी मृत्युका भय एवं सुखकी अनुभूति बताकर कीड़ेका अपने कल्याणका उपाय पूछना  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  13.122.8 
गतिज्ञ: सर्वभूतानां भाषाज्ञश्च शरीरिणाम्।
सर्वज्ञ: स तदा दृष्ट्वा कीटं वचनमव्रवीत्॥ ८॥
 
 
अनुवाद
सर्वज्ञ व्यासजी सभी प्राणियों की गति को जानते हैं और सभी प्राणियों की भाषा समझते हैं। उस कीड़े को देखकर उन्होंने उससे इस प्रकार बात की।
 
Omniscient Vyasa knows the movements of all living beings and understands the language of all living beings. Seeing that insect, he talked to it in this manner.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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