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श्लोक 13.122.6  |
अत्र ते वर्तयिष्यामि पुरावृत्तमिदं नृप।
द्वैपायनस्य संवादं कीटस्य च युधिष्ठिर॥ ६॥ |
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| अनुवाद |
| हे पुरुषोत्तम! युधिष्ठिर! इस विषय में मैं आपसे द्वैपायन व्यास और एक कीड़े के बीच हुए संवाद की प्रसिद्ध प्राचीन कथा कह रहा हूँ ॥6॥ |
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| O lord of men! Yudhishthira! In this matter I am telling you the famous ancient story of the conversation between Dwaipayana Vyasa and an insect. ॥ 6॥ |
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