श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 122: शुभ कर्मसे एक कीडे़को पूर्व-जन्मकी स्मृति होना और कीट-योनिमें भी मृत्युका भय एवं सुखकी अनुभूति बताकर कीड़ेका अपने कल्याणका उपाय पूछना  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  13.122.3 
समृद्धौ वासमृद्धौ वा शुभे वा यदि वाशुभे।
कारणं तत्र मे ब्रूहि सर्वज्ञो ह्यसि मे मत:॥ ३॥
 
 
अनुवाद
प्राणी किसी भी अवस्था में मरना नहीं चाहते, चाहे वह उन्नति कर रही हो या अवनति, शुभ हो या अशुभ। इसका क्या कारण है? कृपया मुझे यह बताइए; क्योंकि मेरी दृष्टि में आप सर्वज्ञ हैं॥3॥
 
Beings do not wish to die in any condition, whether they are progressing or declining, auspicious or inauspicious. What is the reason for this? Please tell me this; because in my view you are omniscient.॥ 3॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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