श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 122: शुभ कर्मसे एक कीडे़को पूर्व-जन्मकी स्मृति होना और कीट-योनिमें भी मृत्युका भय एवं सुखकी अनुभूति बताकर कीड़ेका अपने कल्याणका उपाय पूछना  »  श्लोक 26
 
 
श्लोक  13.122.26 
नृशंसगुणभूयिष्ठं पुरा कर्म कृतं मया।
स्मृत्वा तदनुतप्येऽहं हित्वा प्रियमिवात्मजम्॥ २६॥
 
 
अनुवाद
मैंने पूर्वजन्मों में अधिकांशतः अत्यन्त क्रूर कर्म किये हैं, उनका स्मरण करके मुझे उसी प्रकार पश्चाताप होता है, जैसे कोई मनुष्य अपने प्रिय पुत्र को त्यागकर पश्चाताप करता है॥ 26॥
 
In my previous lives, I have mostly committed deeds that were most cruel. When I remember them, I feel remorseful, just as a person repents after abandoning his beloved son.॥ 26॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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