श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 122: शुभ कर्मसे एक कीडे़को पूर्व-जन्मकी स्मृति होना और कीट-योनिमें भी मृत्युका भय एवं सुखकी अनुभूति बताकर कीड़ेका अपने कल्याणका उपाय पूछना  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  13.122.19 
अहमासं मनुष्यो वै शूद्रो बहुधन: प्रभो।
अब्रह्मण्यो नृशंसश्च कदर्यो वृद्धिजीवन:॥ १९॥
 
 
अनुवाद
प्रभु! पूर्वजन्म में मैं मनुष्य था, और वह भी बहुत धनवान शूद्र। ब्राह्मणों के प्रति मेरा कोई आदर नहीं था। मैं कृपण, क्रूर और सूदखोर था॥19॥
 
Prabhu! In my previous birth I was a human being, and that too a very rich Shudra. I had no respect for Brahmins. I was miserly, cruel and usurious.॥19॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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