श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 122: शुभ कर्मसे एक कीडे़को पूर्व-जन्मकी स्मृति होना और कीट-योनिमें भी मृत्युका भय एवं सुखकी अनुभूति बताकर कीड़ेका अपने कल्याणका उपाय पूछना  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  13.122.14 
दु:खं हि मृत्युर्भूतानां जीवितं च सुदुर्लभम्।
अतो भीत: पलायामि गच्छेयं ना सुखं सुखात्॥ १४॥
 
 
अनुवाद
मृत्यु जीवों के लिए अत्यंत दुःखदायी है। सभी को अपना जीवन अत्यंत दुर्लभ लगता है। इसलिए मैं भयभीत होकर भाग रहा हूँ। कहीं ऐसा न हो कि मैं सुख से दुःख में गिर जाऊँ॥ 14॥
 
Death is very painful for living beings. Everyone finds their life very rare. So I am running away in fear. It may happen that I fall from happiness to sorrow.॥ 14॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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