श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 122: शुभ कर्मसे एक कीडे़को पूर्व-जन्मकी स्मृति होना और कीट-योनिमें भी मृत्युका भय एवं सुखकी अनुभूति बताकर कीड़ेका अपने कल्याणका उपाय पूछना  »  श्लोक 11-12
 
 
श्लोक  13.122.11-12 
श्रूयते न च मां हन्यादिति ह्यस्मादपक्रमे।
श्वसतां च शृणोम्येनं गोपुत्राणां प्रतोद्यताम्॥ ११॥
वहतां सुमहाभारं संनिकर्षे स्वनं प्रभो।
नृणां च संवाहयतां श्रूयते विविध: स्वन:॥ १२॥
 
 
अनुवाद
यह आवाज़ सुनकर मुझे डर लगता है कि कहीं गाड़ी मुझे कुचल न दे। इसलिए मैं यहाँ से जल्दी से जल्दी भाग रहा हूँ। देखो, बैलों को कोड़े मारे जा रहे हैं और वे भारी बोझ उठाए हाँफते हुए आ रहे हैं। हे प्रभु! मैं उनकी आवाज़ें बहुत पास से सुन सकता हूँ। गाड़ी पर बैठे लोगों की तरह-तरह की आवाज़ें भी सुन सकता हूँ। 11-12.
 
When I hear this sound, I fear that the cart might crush me. That is why I am running away from here as quickly as possible. Look, the oxen are being whipped and they are coming panting carrying a heavy load. O Lord! I can hear their voices very close. I can also hear the various types of sounds of the people sitting on the cart. 11-12.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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