श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 122: शुभ कर्मसे एक कीडे़को पूर्व-जन्मकी स्मृति होना और कीट-योनिमें भी मृत्युका भय एवं सुखकी अनुभूति बताकर कीड़ेका अपने कल्याणका उपाय पूछना  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  13.122.10 
कीट उवाच
शकटस्यास्य महतो घोषं श्रुत्वा भयं मम।
आगतं वै महाबुद्धे स्वन एष हि दारुण:॥ १०॥
 
 
अनुवाद
कीड़े ने कहा, "महामते! अपनी ओर आती इस विशाल बैलगाड़ी की घरघराहट की आवाज सुनकर मैं डर गया हूँ, क्योंकि इसकी आवाज बहुत डरावनी है।"
 
The insect said, "Mahamate! I am scared hearing the wheezing sound of this huge bullock cart coming towards me because its sound is very scary."
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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