Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.121.8: इस संसार में हमें अपने प्राणों से अधिक प्रिय कोई वस्तु नहीं है। इसलिए मनुष्य को दूसरों पर उसी प्रकार दया करनी चाहिए जिस प्रकार वह अपने लिए दया चाहता है। 8. | mahabharat अध्याय 13.121: मांस न खानेसे लाभ और अहिंसाधर्मकी प्रशंसा । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
न हि प्राणात् प्रियतरं लोके किंचन विद्यते।
तस्माद् दयां नर: कुर्याद् यथाऽऽत्मनि तथा परे॥ ८॥
अनुवाद
इस संसार में हमें अपने प्राणों से अधिक प्रिय कोई वस्तु नहीं है। इसलिए मनुष्य को दूसरों पर उसी प्रकार दया करनी चाहिए जिस प्रकार वह अपने लिए दया चाहता है। 8.
There is nothing in this world more dear to us than our own lives. Therefore, a man should show mercy to others in the same way as he wants mercy for himself. 8.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥