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mahabharat 13.120.9: राजन! सप्तर्षि, वालखिल्य आदि ऋषिगण, सूर्य की किरणों का पान करने वाले महर्षि, मांस न खाने की प्रशंसा करते हैं॥9॥   |   mahabharat अध्याय 13.120: मद्य और मांसके भक्षणमें महान् दोष, उनके त्यागकी महिमा एवं त्यागमें परम लाभका प्रतिपादन   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 120: मद्य और मांसके भक्षणमें महान् दोष, उनके त्यागकी महिमा एवं त्यागमें परम लाभका प्रतिपादन  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  13.120.9 
सप्तर्षयो वालखिल्यास्तथैव च मरीचिपा:।
अमांसभक्षणं राजन् प्रशंसन्ति मनीषिण:॥ ९॥
 
 
अनुवाद
राजन! सप्तर्षि, वालखिल्य आदि ऋषिगण, सूर्य की किरणों का पान करने वाले महर्षि, मांस न खाने की प्रशंसा करते हैं॥9॥
 
Rajan! Saptarishi, Valakhilya and other sages who drink the rays of the sun, Maharishi, praise not eating meat. 9॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)