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mahabharat 13.120.75: हे कुरुश्रेष्ठ! इसके प्रभाव से मनुष्य तिर्यग्योनियों में नहीं पड़ता तथा सुन्दर रूप, धन और महान यश प्राप्त करता है ॥75॥   |   mahabharat अध्याय 13.120: मद्य और मांसके भक्षणमें महान् दोष, उनके त्यागकी महिमा एवं त्यागमें परम लाभका प्रतिपादन   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 120: मद्य और मांसके भक्षणमें महान् दोष, उनके त्यागकी महिमा एवं त्यागमें परम लाभका प्रतिपादन  »  श्लोक 75
 
 
श्लोक  13.120.75 
तिर्यग्योनिं न गच्छेत रूपवांश्च भवेन्नर:।
ऋद्धिमान् वै कुरुश्रेष्ठ प्राप्नुयाच्च महद् यश:॥ ७५॥
 
 
अनुवाद
हे कुरुश्रेष्ठ! इसके प्रभाव से मनुष्य तिर्यग्योनियों में नहीं पड़ता तथा सुन्दर रूप, धन और महान यश प्राप्त करता है ॥75॥
 
Kurushrestha! Due to its effect, man does not fall into Tiryagyoni and he gets beautiful form, wealth and great fame. 75॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)