Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 13.120.48: जो मनुष्य अपने को पूर्णतया क्लेशरहित रखना चाहता है, उसे इस संसार में प्राणियों के मांस का सर्वथा त्याग कर देना चाहिए ॥48॥   |   mahabharat अध्याय 13.120: मद्य और मांसके भक्षणमें महान् दोष, उनके त्यागकी महिमा एवं त्यागमें परम लाभका प्रतिपादन   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 120: मद्य और मांसके भक्षणमें महान् दोष, उनके त्यागकी महिमा एवं त्यागमें परम लाभका प्रतिपादन  »  श्लोक 48
 
 
श्लोक  13.120.48 
य इच्छेत् पुरुषोऽत्यन्तमात्मानं निरुपद्रवम्।
स वर्जयेत मांसानि प्राणिनामिह सर्वश:॥ ४८॥
 
 
अनुवाद
जो मनुष्य अपने को पूर्णतया क्लेशरहित रखना चाहता है, उसे इस संसार में प्राणियों के मांस का सर्वथा त्याग कर देना चाहिए ॥48॥
 
The person who wants to keep himself completely trouble-free should completely abandon the flesh of living beings in this world. 48॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)