श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 120: मद्य और मांसके भक्षणमें महान् दोष, उनके त्यागकी महिमा एवं त्यागमें परम लाभका प्रतिपादन  »  श्लोक 46
 
 
श्लोक  13.120.46 
इदमन्यत्तु वक्ष्यामि प्रमाणं विधिनिर्मितम्।
पुराणमृषिभिर्जुष्टं वेदेषु परिनिष्ठितम्॥ ४६॥
 
 
अनुवाद
अब मैं इस विषय में तुमसे दूसरा प्रमाण कहता हूँ, जो स्वयं ब्रह्माजी द्वारा प्रतिपादित, प्राचीन, ऋषियों द्वारा अनुसरित और वेदों में प्रतिष्ठित है ॥ 46॥
 
Now I am telling you another proof in this regard, which is propounded by Brahmaji himself, is ancient, followed by sages and is established in the Vedas. ॥ 46॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)