श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 120: मद्य और मांसके भक्षणमें महान् दोष, उनके त्यागकी महिमा एवं त्यागमें परम लाभका प्रतिपादन  »  श्लोक 40
 
 
श्लोक  13.120.40 
अधृष्य: सर्वभूतानामायुष्मान् नीरुज: सदा।
भवत्यभक्षयन् मांसं दयावान् प्राणिनामिह॥ ४०॥
 
 
अनुवाद
जो मनुष्य मांस नहीं खाता और इस संसार में सब जीवों पर दया करता है, उसका कोई भी प्राणी तिरस्कार नहीं करता और वह सदैव दीर्घायु होकर स्वस्थ रहता है ॥40॥
 
The person who does not eat meat and is kind to all living beings in this world, no creature despises him and he always lives a long life and remains healthy. ॥ 40॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)