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श्री महाभारत
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पर्व 13: अनुशासन पर्व
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अध्याय 120: मद्य और मांसके भक्षणमें महान् दोष, उनके त्यागकी महिमा एवं त्यागमें परम लाभका प्रतिपादन
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श्लोक 33
श्लोक
13.120.33
लोभाद् वा बुद्धिमोहाद्वा बलवीर्यार्थमेव च।
संसर्गादथ पापानामधर्मरुचिता नृणाम्॥ ३३॥
अनुवाद
लोभ, बुद्धि की आसक्ति, शक्ति के लोभ से अथवा पापियों के सम्पर्क में आने से लोग अधर्म में रुचि लेते हैं ॥33॥
People become interested in unrighteousness due to greed, attachment to the intellect, for the sake of power or by coming in contact with sinners. 33॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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