श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 120: मद्य और मांसके भक्षणमें महान् दोष, उनके त्यागकी महिमा एवं त्यागमें परम लाभका प्रतिपादन  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  13.120.14 
मासि मास्यश्वमेधेन यो यजेत शतं समा:।
न खादति च यो मांसं सममेतन्मतं मम॥ १४॥
 
 
अनुवाद
जो सौ वर्षों तक प्रति मास अश्वमेध यज्ञ करता है और जो कभी मांस नहीं खाता - दोनों का फल समान माना गया है ॥14॥
 
One who performs the Ashwamedha Yagna every month for a hundred years and one who never eats meat - both are considered to have the same results. ॥ 14॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)