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mahabharat 13.12.d6: हे भरतश्रेष्ठ! जब वे ध्यान कर रहे थे, तब इन्द्र ने बिजली की चमक और बादलों की गड़गड़ाहट के साथ भारी वर्षा आरम्भ कर दी।   |   mahabharat अध्याय 13.12: कृतघ्नकी गति और प्रायश्चित्तका वर्णन तथा स्त्री-पुरुषके संयोगमें स्त्रीको ही अधिक सुख होनेके सम्बन्धमें भंगास्वनका उपाख्यान   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  13.12.d6 
तस्मिंश्च तप्यति तपो वासवो भरतर्षभ॥
ववर्ष सुमहद् वर्षं सविद्युत्स्तनयित्नुमान्।
 
 
अनुवाद
हे भरतश्रेष्ठ! जब वे ध्यान कर रहे थे, तब इन्द्र ने बिजली की चमक और बादलों की गड़गड़ाहट के साथ भारी वर्षा आरम्भ कर दी।
 
O best of the Bharatas! While he was meditating, Indra started a heavy downpour accompanied by flashes of lightning and the loud rumbling of clouds.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)