Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 13.12.d18: तत्पश्चात धर्म के प्रति अपनी निष्ठा के कारण ऋषि के मन में यह विचार उत्पन्न हुआ कि जो लोग विश्वासघाती और कृतघ्न होते हैं, वे नरक में जाते हैं।   |   mahabharat अध्याय 13.12: कृतघ्नकी गति और प्रायश्चित्तका वर्णन तथा स्त्री-पुरुषके संयोगमें स्त्रीको ही अधिक सुख होनेके सम्बन्धमें भंगास्वनका उपाख्यान   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 12: कृतघ्नकी गति और प्रायश्चित्तका वर्णन तथा स्त्री-पुरुषके संयोगमें स्त्रीको ही अधिक सुख होनेके सम्बन्धमें भंगास्वनका उपाख्यान  »  श्लोक d18
 
 
श्लोक  13.12.d18 
तस्य बुद्धिरियं जाता धर्मसंसक्तिजा मुने:।
कृतघ्ना नरकं यान्ति ये तु विश्वासघातिन:॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात धर्म के प्रति अपनी निष्ठा के कारण ऋषि के मन में यह विचार उत्पन्न हुआ कि जो लोग विश्वासघाती और कृतघ्न होते हैं, वे नरक में जाते हैं।
 
Thereafter, due to his devotion to religion, this thought arose in the sage's mind that those who are treacherous and ungrateful go to hell.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)