Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.12.d14-d15: तत्पश्चात्, विशाल दिशाओं, पर्वत शिखरों, जल में डूबी हुई सम्पूर्ण पृथ्वी तथा जल के जलाशयों को देखकर ब्राह्मण वत्सनाभ अत्यन्त प्रसन्न हुए। | mahabharat अध्याय 13.12: कृतघ्नकी गति और प्रायश्चित्तका वर्णन तथा स्त्री-पुरुषके संयोगमें स्त्रीको ही अधिक सुख होनेके सम्बन्धमें भंगास्वनका उपाख्यान । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
दिश: सुविपुलास्तत्र गिरीणां शिखराणि च॥
दृष्ट्वा च पृथिवीं सर्वां सलिलेन परिप्लुताम्।
जलाशयान् स तान् दृष्ट्वा विप्र: प्रमुदितोऽभवत् ॥
अनुवाद
तत्पश्चात्, विशाल दिशाओं, पर्वत शिखरों, जल में डूबी हुई सम्पूर्ण पृथ्वी तथा जल के जलाशयों को देखकर ब्राह्मण वत्सनाभ अत्यन्त प्रसन्न हुए।
Thereafter, seeing the vast directions, mountain peaks, the entire earth submerged in water and the reservoirs of water, the Brahmin Vatsanaabha became very happy.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥