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mahabharat 13.12.d11: वह एक विशाल और सुंदर भैंसे का रूप धारण करके उसके ऊपर खड़ा हो गया और अपने बछड़े की रक्षा के लिए अपने चारों पैर उसके चारों ओर रख दिए।   |   mahabharat अध्याय 13.12: कृतघ्नकी गति और प्रायश्चित्तका वर्णन तथा स्त्री-पुरुषके संयोगमें स्त्रीको ही अधिक सुख होनेके सम्बन्धमें भंगास्वनका उपाख्यान   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 12: कृतघ्नकी गति और प्रायश्चित्तका वर्णन तथा स्त्री-पुरुषके संयोगमें स्त्रीको ही अधिक सुख होनेके सम्बन्धमें भंगास्वनका उपाख्यान  »  श्लोक d11
 
 
श्लोक  13.12.d11 
स्वं रूपं माहिषं कृत्वा सुमहान्तं मनोहरम्।
त्राणार्थं वत्सनाभस्य चतुष्पादुपरि स्थित:॥
 
 
अनुवाद
वह एक विशाल और सुंदर भैंसे का रूप धारण करके उसके ऊपर खड़ा हो गया और अपने बछड़े की रक्षा के लिए अपने चारों पैर उसके चारों ओर रख दिए।
 
Taking the form of a huge and beautiful buffalo, he stood over him, placing his four legs around him to protect his calf.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)