Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.12.d10: तपस्या में तत्पर उस परम धार्मिक ब्रह्मर्षि का चिन्तन करते हुए धर्म के हृदय में शीघ्र ही एक स्वाभाविक सद्बुद्धि उत्पन्न हुई, जो उसके समान ही थी। | mahabharat अध्याय 13.12: कृतघ्नकी गति और प्रायश्चित्तका वर्णन तथा स्त्री-पुरुषके संयोगमें स्त्रीको ही अधिक सुख होनेके सम्बन्धमें भंगास्वनका उपाख्यान । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
तपस्या में तत्पर उस परम धार्मिक ब्रह्मर्षि का चिन्तन करते हुए धर्म के हृदय में शीघ्र ही एक स्वाभाविक सद्बुद्धि उत्पन्न हुई, जो उसके समान ही थी।
Thinking about that extremely religious Brahmarshi engaged in tapasya, soon a natural good sense arose in the heart of Dharma, which was similar to him.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥