Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 13.12.5: जब देवताओं के पराक्रमी राजा इन्द्र को इस यज्ञ के बारे में पता चला, तब वे अपने मन पर नियंत्रण रखने वाले राजा भंगस्वन का बचाव ढूँढ़ने लगे ॥5॥   |   mahabharat अध्याय 13.12: कृतघ्नकी गति और प्रायश्चित्तका वर्णन तथा स्त्री-पुरुषके संयोगमें स्त्रीको ही अधिक सुख होनेके सम्बन्धमें भंगास्वनका उपाख्यान   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 12: कृतघ्नकी गति और प्रायश्चित्तका वर्णन तथा स्त्री-पुरुषके संयोगमें स्त्रीको ही अधिक सुख होनेके सम्बन्धमें भंगास्वनका उपाख्यान  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  13.12.5 
इन्द्रो ज्ञात्वा तु तं यज्ञं महाभाग: सुरेश्वर:।
अन्तरं तस्य राजर्षेरन्विच्छन्नियतात्मन:॥ ५॥
 
 
अनुवाद
जब देवताओं के पराक्रमी राजा इन्द्र को इस यज्ञ के बारे में पता चला, तब वे अपने मन पर नियंत्रण रखने वाले राजा भंगस्वन का बचाव ढूँढ़ने लगे ॥5॥
 
When the mighty king of gods Indra came to know about this sacrifice, he began to look for the loophole of the king, Bhangasvan, who had control over his mind. ॥ 5॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)