Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.12.42-43: उनके इस प्रकार नमस्कार करने पर इन्द्र प्रसन्न हुए और वर देने को तत्पर होकर बोले - हे राजन! आपके पुत्रों में से कौन जीवित रहेगा? वे जिन्हें आपने स्त्री होकर जन्म दिया था अथवा वे जो आपके पुरुष होने पर उत्पन्न हुए थे?॥42-43॥ | mahabharat अध्याय 13.12: कृतघ्नकी गति और प्रायश्चित्तका वर्णन तथा स्त्री-पुरुषके संयोगमें स्त्रीको ही अधिक सुख होनेके सम्बन्धमें भंगास्वनका उपाख्यान । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
प्रणिपातेन तस्येन्द्र: परितुष्टो वरं ददौ॥ ४२॥
पुत्रास्ते कतमे राजन् जीवन्त्वेतत् प्रचक्ष्व मे।
स्त्रीभूतस्य हि ये जाता: पुरुषस्याथ येऽभवन्॥ ४३॥
अनुवाद
उनके इस प्रकार नमस्कार करने पर इन्द्र प्रसन्न हुए और वर देने को तत्पर होकर बोले - हे राजन! आपके पुत्रों में से कौन जीवित रहेगा? वे जिन्हें आपने स्त्री होकर जन्म दिया था अथवा वे जो आपके पुरुष होने पर उत्पन्न हुए थे?॥42-43॥
‘After being thus saluted by them, Indra became pleased and being ready to grant a boon said, O King! Which of your sons will be alive? Those whom you gave birth to as a woman or those who were born to you when you were a man?’॥ 42-43॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥