Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.12.41-42h: इन्द्र को देखकर स्त्रीवेशधारी राजर्षि ने उनके चरणों पर सिर रखकर कहा, 'हे देवश्रेष्ठ! आप प्रसन्न हों। मैंने पुत्र प्राप्ति की इच्छा से वह यज्ञ किया था। हे देवराज! कृपया मुझे क्षमा करें।' | mahabharat अध्याय 13.12: कृतघ्नकी गति और प्रायश्चित्तका वर्णन तथा स्त्री-पुरुषके संयोगमें स्त्रीको ही अधिक सुख होनेके सम्बन्धमें भंगास्वनका उपाख्यान । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
इन्द्रं दृष्ट्वा तु राजर्षि: पादयो: शिरसा गत:।
प्रसीद त्रिदशश्रेष्ठ पुत्रकामेन स क्रतु:॥ ४१॥
इष्टस्त्रिदशशार्दूल तत्र मे क्षन्तुमर्हसि।
अनुवाद
इन्द्र को देखकर स्त्रीवेशधारी राजर्षि ने उनके चरणों पर सिर रखकर कहा, 'हे देवश्रेष्ठ! आप प्रसन्न हों। मैंने पुत्र प्राप्ति की इच्छा से वह यज्ञ किया था। हे देवराज! कृपया मुझे क्षमा करें।'
Seeing Indra, the king sage in the guise of a woman placed his head at his feet and said, 'O best of the gods! May you be pleased. I performed that sacrifice with the desire of having a son. O lord of gods! Please forgive me for that.'
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥