Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.12.40: तूने उस पुरुष का यज्ञ किया जो मुझसे शत्रुता रखता है। मुझे बुलाए बिना ही तूने यज्ञ पूरा कर दिया। हे मूर्ख स्त्री! मैं वही इन्द्र हूँ और मैंने तुझसे अपने शत्रुता का बदला ले लिया है।॥40॥ | mahabharat अध्याय 13.12: कृतघ्नकी गति और प्रायश्चित्तका वर्णन तथा स्त्री-पुरुषके संयोगमें स्त्रीको ही अधिक सुख होनेके सम्बन्धमें भंगास्वनका उपाख्यान । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
तूने उस पुरुष का यज्ञ किया जो मुझसे शत्रुता रखता है। मुझे बुलाए बिना ही तूने यज्ञ पूरा कर दिया। हे मूर्ख स्त्री! मैं वही इन्द्र हूँ और मैंने तुझसे अपने शत्रुता का बदला ले लिया है।॥40॥
‘You performed the yajna of that person who is in enmity with me. Without invoking me, you completed the yajna. You foolish woman! I am the same Indra and I have taken revenge of my enmity from you.’॥ 40॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥