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mahabharat 13.12.20: उस घने जंगल में प्यास से व्याकुल और लगभग अचेत अवस्था में मैंने एक झील देखी जो पक्षियों से घिरी हुई थी और मनमोहक सौंदर्य से परिपूर्ण थी।   |   mahabharat अध्याय 13.12: कृतघ्नकी गति और प्रायश्चित्तका वर्णन तथा स्त्री-पुरुषके संयोगमें स्त्रीको ही अधिक सुख होनेके सम्बन्धमें भंगास्वनका उपाख्यान   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 12: कृतघ्नकी गति और प्रायश्चित्तका वर्णन तथा स्त्री-पुरुषके संयोगमें स्त्रीको ही अधिक सुख होनेके सम्बन्धमें भंगास्वनका उपाख्यान  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  13.12.20 
अटव्यां च सुघोरायां तृष्णार्तो नष्टचेतन:।
सर: सुरुचिरप्रख्यमपश्यं पक्षिभिर्वृतम्॥ २०॥
 
 
अनुवाद
उस घने जंगल में प्यास से व्याकुल और लगभग अचेत अवस्था में मैंने एक झील देखी जो पक्षियों से घिरी हुई थी और मनमोहक सौंदर्य से परिपूर्ण थी।
 
In that dense forest, being thirsty and almost unconscious, I saw a lake which was surrounded by birds and was full of lovely beauty.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)