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mahabharat 13.12.18-19: तब महाबली राजा भंगस्वान् ने, जो स्त्री वेश में थे और वक्ताओं में श्रेष्ठ थे, कहा, 'अपनी सेना से घिरा हुआ मैं शिकार के लिए निकला था, किन्तु दैवी प्रेरणा से मैं भ्रमित होकर एक भयानक वन में जा घुसा।   |   mahabharat अध्याय 13.12: कृतघ्नकी गति और प्रायश्चित्तका वर्णन तथा स्त्री-पुरुषके संयोगमें स्त्रीको ही अधिक सुख होनेके सम्बन्धमें भंगास्वनका उपाख्यान   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 12: कृतघ्नकी गति और प्रायश्चित्तका वर्णन तथा स्त्री-पुरुषके संयोगमें स्त्रीको ही अधिक सुख होनेके सम्बन्धमें भंगास्वनका उपाख्यान  »  श्लोक 18-19
 
 
श्लोक  13.12.18-19 
अथोवाच स राजर्षि: स्त्रीभूतो वदतां वर:॥ १८॥
मृगयामस्मि निर्यातो बलै: परिवृतो दृढम्।
उद्‍भ्रान्त: प्राविशं घोरामटवीं दैवचोदित:॥ १९॥
 
 
अनुवाद
तब महाबली राजा भंगस्वान् ने, जो स्त्री वेश में थे और वक्ताओं में श्रेष्ठ थे, कहा, 'अपनी सेना से घिरा हुआ मैं शिकार के लिए निकला था, किन्तु दैवी प्रेरणा से मैं भ्रमित होकर एक भयानक वन में जा घुसा।
 
Then the great king Bhangasvan, who was disguised as a woman, and who was the best among speakers, said, 'Surrounded by my army, I had set out for hunting, but due to the divine inspiration, I became confused and entered a dreadful forest.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)