Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 13.119.12: जैसे पिता और माता के संयोग से बालक का जन्म होता है, वैसे ही हिंसा करने वाला पापी मनुष्य बार-बार पाप योनियों में जन्म लेने को विवश होता है ॥12॥   |   mahabharat अध्याय 13.119: हिंसा और मांसभक्षणकी घोर निन्दा   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 119: हिंसा और मांसभक्षणकी घोर निन्दा  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  13.119.12 
पितृमातृसमायोगे पुत्रत्वं जायते यथा।
हिंसां कृत्वावश: पापो भूयिष्ठं जायते तथा॥ १२॥
 
 
अनुवाद
जैसे पिता और माता के संयोग से बालक का जन्म होता है, वैसे ही हिंसा करने वाला पापी मनुष्य बार-बार पाप योनियों में जन्म लेने को विवश होता है ॥12॥
 
Just as a child is born from the union of a father and mother, similarly a sinful person who commits violence is forced to take birth in sinful wombs again and again. ॥12॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)