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एतत् ते सर्वमाख्यातमन्नदानफलं महत्।
मूलमेतत् तु धर्माणां प्रदानानां च भारत॥ ३१॥
अनुवाद
हे भारत! अन्नदान ही सब प्रकार के धर्मों और दानों का मूल है। इस प्रकार मैंने अन्नदान के सभी महान लाभों को तुमसे कहा है॥31॥
Bharat! Donation of food is the root of all kinds of religions and donations. In this way I have told you all the great benefits of donating food. ॥ 31॥
इति श्रीमहाभारते अनुशासनपर्वणि दानधर्मपर्वणि संसारचक्रे द्वादशाधिकशततमोऽध्याय:॥ ११२॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत अनुशासनपर्वके अन्तर्गत दानधर्मपर्वमें संसारचक्रविषयक एक सौ बारहवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ११२॥
(दाक्षिणात्य अधिक पाठके ४ श्लोक मिलाकर कुल ३५ श्लोक हैं)
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥